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mahabharat 7.145.22: मानन्द! अनेक वीर योद्धा युद्ध कर रहे हैं और सूर्य अस्त हो रहा है। अतः मुझे संदेह है कि अर्जुन जयद्रथ तक पहुँच पाएगा या नहीं।   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.145.22 
युध्यन्ते बहव: शूरा लम्बते च दिवाकर:।
शङ्के जयद्रथं पार्थो नैव प्राप्स्यति मानद॥ २२॥
 
 
अनुवाद
मानन्द! अनेक वीर योद्धा युद्ध कर रहे हैं और सूर्य अस्त हो रहा है। अतः मुझे संदेह है कि अर्जुन जयद्रथ तक पहुँच पाएगा या नहीं।
 
Manand! Many brave warriors are fighting and the sun is setting. Therefore, I doubt whether Arjuna will be able to reach Jayadratha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)