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mahabharat 7.145.18: कर्ण! निश्चय ही किरीटधारी पाण्डव अर्जुन ने अपने ही विनाश के लिए जयद्रथ को मारने की प्रतिज्ञा की है॥18॥   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.145.18 
नूनमात्मविनाशाय पाण्डवेन किरीटिना।
प्रतिज्ञेयं कृता कर्ण जयद्रथवधं प्रति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
कर्ण! निश्चय ही किरीटधारी पाण्डव अर्जुन ने अपने ही विनाश के लिए जयद्रथ को मारने की प्रतिज्ञा की है॥18॥
 
Karna! Surely the crown-wearing Pandava Arjuna has made this vow to kill Jayadratha for his own destruction.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)