Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.145.15: हे आदरणीय! तब अर्जुन के बिना उसके भाई और अनुयायी इस पृथ्वी पर दो क्षण भी जीवित नहीं रह सकते।   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.145.15 
अनर्जुनायां च भुवि मुहूर्तमपि मानद।
जीवितुुं नोत्सहेरन् वै भ्रातरोऽस्य सहानुगा:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे आदरणीय! तब अर्जुन के बिना उसके भाई और अनुयायी इस पृथ्वी पर दो क्षण भी जीवित नहीं रह सकते।
 
Respected! Then, without Arjuna, his brothers and followers cannot survive for even two moments on this earth. 15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)