श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 144: सात्यकिके भूरिश्रवाद्वारा अपमानित होनेका कारण तथा वृष्णिवंशी वीरोंकी प्रशंसा  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  7.144.6-7 
ययातेर्देवयान्यां तु यदुर्ज्येष्ठोऽभवत् सुत:।
यदोरभूदन्ववाये देवमीढ इति स्मृत:॥ ६॥
यादवस्तस्य तु सुत: शूरस्त्रैलोक्यसम्मत:।
शूरस्य शौरिर्नृवरो वसुदेवो महायशा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
ययाति के गर्भ से देवयानी के जो ज्येष्ठ पुत्र उत्पन्न हुए, उनका नाम यदु था। इन्हीं यदुओं के वंश में देवमीढ़ नामक एक विख्यात यादव हुए। इनके पुत्र का नाम शूर था, जो तीनों लोकों में प्रतिष्ठित थे। शूर का पुत्र श्रेष्ठ योद्धा था, जो महाबली वसुदेव के नाम से विख्यात है। 6-7॥
 
The eldest son born from the womb of Yayati to Devayani was named Yadu. In the lineage of these Yadus, there was a famous Yadav named Devamidh. His son's name was Shur, who was respected in all three worlds. The son of Shura was the best warrior, who is famous by the name of great Vasudev. 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)