श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 144: सात्यकिके भूरिश्रवाद्वारा अपमानित होनेका कारण तथा वृष्णिवंशी वीरोंकी प्रशंसा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.144.28 
तेन वृष्णिप्रवीराणां चक्रं न प्रतिहन्यते।
अपि मेरुं वहेत् कश्चित् तरेद् वा मकरालयम्।
न तु वृष्णिप्रवीराणां समेत्यान्तं व्रजेन्नृप॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इस कारण वृष्णि योद्धाओं के इस समूह को कोई हानि नहीं पहुँचा सकता । नरेश्वर ! कोई मेरु पर्वत को अपने सिर पर उठा सकता है अथवा अपने हाथों से समुद्र को तैरकर पार कर सकता है; परन्तु वृष्णि योद्धाओं के इस समूह का विनाश नहीं हो सकता ॥28॥
 
Due to this, this group of Vrishni warriors is not harmed by anyone. Nareshwar! Someone can lift the Meru mountain on his head or swim across the ocean with his hands; But the group of Vrishni warriors cannot be destroyed. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)