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mahabharat 7.144.25-26: वे ब्राह्मणों, गुरुओं तथा बन्धु-बान्धवों का धन छीनने के लिए कभी हिंसा नहीं करते। इन ब्राह्मणों, गुरुओं आदि में जो भी किसी प्रकार की विपत्ति में पड़ा होता है, ये वृष्णिवंशी उसकी रक्षा करते हैं। ये सभी धनवान, अभिमानरहित, ब्राह्मणभक्त तथा सत्यवादी हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.144: सात्यकिके भूरिश्रवाद्वारा अपमानित होनेका कारण तथा वृष्णिवंशी वीरोंकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 144: सात्यकिके भूरिश्रवाद्वारा अपमानित होनेका कारण तथा वृष्णिवंशी वीरोंकी प्रशंसा  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  7.144.25-26 
ब्रह्मद्रव्ये गुरुद्रव्ये ज्ञातिस्वे चाप्यहिंसका:॥ २५॥
एतेषां रक्षितारश्च ये स्यु: कस्याञ्चिदापदि।
अर्थवन्तो न चोत्सिक्ता ब्रह्मण्या: सत्यवादिन:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वे ब्राह्मणों, गुरुओं तथा बन्धु-बान्धवों का धन छीनने के लिए कभी हिंसा नहीं करते। इन ब्राह्मणों, गुरुओं आदि में जो भी किसी प्रकार की विपत्ति में पड़ा होता है, ये वृष्णिवंशी उसकी रक्षा करते हैं। ये सभी धनवान, अभिमानरहित, ब्राह्मणभक्त तथा सत्यवादी हैं।
 
They never use violence to take the money of Brahmins, Gurus and relatives. These Vrishnivanshis protect whoever is facing any problem among these Brahmins, Gurus etc. All of them are wealthy, without pride, devotees of Brahmins and truthful.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)