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mahabharat 7.144.21: युद्धस्थल में सात्यकि को श्रेष्ठ पुरुष भी नहीं हरा सकते। वृष्णिवंशी योद्धा अपने लक्ष्य पर सफलतापूर्वक प्रहार करते हैं। वे युद्धस्थल में अनेक विचित्र प्रकार से युद्ध करते हैं॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 7.144: सात्यकिके भूरिश्रवाद्वारा अपमानित होनेका कारण तथा वृष्णिवंशी वीरोंकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 144: सात्यकिके भूरिश्रवाद्वारा अपमानित होनेका कारण तथा वृष्णिवंशी वीरोंकी प्रशंसा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.144.21 
न हि शक्यो रणे जेतुं सात्वतो मनुजर्षभै:।
लब्धलक्ष्याश्च संग्रामे बहुशश्चित्रयोधिन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
युद्धस्थल में सात्यकि को श्रेष्ठ पुरुष भी नहीं हरा सकते। वृष्णिवंशी योद्धा अपने लक्ष्य पर सफलतापूर्वक प्रहार करते हैं। वे युद्धस्थल में अनेक विचित्र प्रकार से युद्ध करते हैं॥ 21॥
 
Satyaki cannot be defeated even by the best of men in the battlefield. The warriors of the Vrishni clan successfully hit their target. They fight in many strange ways on the battlefield.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)