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mahabharat 7.144.15: माननीय राजा! जब शिनि ने सोमदत्त को ऐसी दयनीय स्थिति में डाल दिया, तब उसने अमर्ष के प्रभाव से महादेवजी की आराधना करके उन्हें प्रसन्न किया॥15॥   |   mahabharat अध्याय 7.144: सात्यकिके भूरिश्रवाद्वारा अपमानित होनेका कारण तथा वृष्णिवंशी वीरोंकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 144: सात्यकिके भूरिश्रवाद्वारा अपमानित होनेका कारण तथा वृष्णिवंशी वीरोंकी प्रशंसा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.144.15 
तदवस्थ: कृतस्तेन सोमदत्तोऽथ मारिष।
प्रासादयन्महादेवममर्षवशमास्थित:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
माननीय राजा! जब शिनि ने सोमदत्त को ऐसी दयनीय स्थिति में डाल दिया, तब उसने अमर्ष के प्रभाव से महादेवजी की आराधना करके उन्हें प्रसन्न किया॥15॥
 
Honorable King! When Shini put Somdutt in such a miserable condition, he, under the influence of Amarsh, pleased Mahadevji by worshiping him. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)