श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 144: सात्यकिके भूरिश्रवाद्वारा अपमानित होनेका कारण तथा वृष्णिवंशी वीरोंकी प्रशंसा  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  7.144.1-2 
धृतराष्ट्र उवाच
अजितो द्रोणराधेयविकर्णकृतवर्मभि:।
तीर्ण: सैन्यार्णवं वीर: प्रतिश्रुत्य युधिष्ठिरे॥ १॥
स कथं कौरवेयेण समरेष्वनिवारिता:।
निगृह्य भूरिश्रवसा बलाद् भुवि निपातित:॥ २॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! जो वीर सात्यकि द्रोण, कर्ण, विकर्ण और कृतवर्मा से भी पराजित नहीं हुआ था और जिसने युधिष्ठिर को दी हुई प्रतिज्ञा के अनुसार कौरव सेना को समुद्र पार कर लिया था, जिसे युद्धस्थल में कोई नहीं रोक सका था, उसे कुरुवंशी भूरिश्रवाण ने बलपूर्वक पकड़कर पृथ्वी पर कैसे पटक दिया?॥1-2॥
 
Dhritarashtra asked - Sanjay! The brave Satyaki who was not defeated even by Drona, Karna, Vikarna and Kritavarma and who crossed the ocean of Kaurava army as per the promise made to Yudhishthira, who nobody could stop in the battlefield, how did the Kuru descendant Bhurishravane forcibly catch hold of him and throw him down on the earth?॥1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)