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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक d5
 
 
श्लोक  7.143.d5 
सात्यकिश्च वशं नीत: कौरवेण महात्मना।
ततो मयैतच्चरितं प्रतिज्ञारक्षणं प्रति॥
 
 
अनुवाद
महान कुरुवंशी सेनापति भूरिश्रवण ने सात्यकि को अपने वश में कर लिया था। अतः मैंने अपने वचन की रक्षा के लिए यह कार्य किया है।'
 
‘The great Kuru dynasty leader Bhurishravane had brought Satyaki under his control. Hence, I have done this to protect my promise.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)