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mahabharat 7.143.d4: यह मेरा दृढ़ संकल्प है कि मुझे अपने प्रियजनों की रक्षा करनी चाहिए जब उनका जीवन खतरे में हो; विशेष रूप से उन बहादुर पुरुषों की जो मेरी आंखों के सामने मारे जा रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  7.143.d4 
अस्मदीया मया रक्ष्या: प्राणबाध उपस्थिते।
ये मे प्रत्यक्षतो वीरा हन्येरन्निति मे मति:॥
 
 
अनुवाद
यह मेरा दृढ़ संकल्प है कि मुझे अपने प्रियजनों की रक्षा करनी चाहिए जब उनका जीवन खतरे में हो; विशेष रूप से उन बहादुर पुरुषों की जो मेरी आंखों के सामने मारे जा रहे हैं।
 
‘It is my firm resolve that I must protect my dear ones when their lives are in danger; especially those brave men who are being killed in front of my eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)