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mahabharat 7.143.8: बुद्धिमान पुरुष असावधान, भयभीत, रथहीन, प्राणों की भीख मांगने वाले अथवा संकट में पड़े हुए व्यक्ति पर आक्रमण नहीं करता ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.143.8 
न प्रमत्ताय भीताय विरथाय प्रयाचते।
व्यसने वर्तमानाय प्रहरन्ति मनस्विन:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पुरुष असावधान, भयभीत, रथहीन, प्राणों की भीख मांगने वाले अथवा संकट में पड़े हुए व्यक्ति पर आक्रमण नहीं करता ॥8॥
 
A wise man does not attack a person who is careless, frightened, without a chariot, begging for his life or a person in trouble. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)