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mahabharat 7.143.71: वरदाता भूरिश्रवा का कटा हुआ सिर, नीले बालों से सुशोभित तथा कबूतर के समान लाल नेत्रों वाला, ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो अश्वमेध के मेध्य घोड़े का कटा हुआ सिर अग्निकुण्ड में रख दिया गया हो।   |   mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.143.71 
सुनीलकेशं वरदस्य तस्य
शूरस्य पारावतलोहिताक्षम्।
अश्वस्य मेध्यस्य शिरो निकृत्तं
न्यस्तं हविर्धानमिवान्तरेण॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
वरदाता भूरिश्रवा का कटा हुआ सिर, नीले बालों से सुशोभित तथा कबूतर के समान लाल नेत्रों वाला, ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो अश्वमेध के मेध्य घोड़े का कटा हुआ सिर अग्निकुण्ड में रख दिया गया हो।
 
The severed head of the boon-giver Bhurishrava, adorned with blue hair and having red eyes like those of a dove, looked as if the severed head of the Medhya horse of Ashwamedha had been placed inside a fire pit. 71.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)