Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.143.67-68: महर्षि वाल्मीकि ने पूर्वकाल में इस पृथ्वी पर एक श्लोक गाया है। जिसका भावार्थ इस प्रकार है - 'वानर! तू कहता है कि स्त्रियों को नहीं मारना चाहिए, उसके उत्तर में मैं कहता हूँ कि पुरुषार्थी पुरुष के लिए सदैव वही कार्य करना उचित माना गया है, जिससे शत्रुओं को पीड़ा पहुँचे।' ॥67-68॥ | mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महर्षि वाल्मीकि ने पूर्वकाल में इस पृथ्वी पर एक श्लोक गाया है। जिसका भावार्थ इस प्रकार है - 'वानर! तू कहता है कि स्त्रियों को नहीं मारना चाहिए, उसके उत्तर में मैं कहता हूँ कि पुरुषार्थी पुरुष के लिए सदैव वही कार्य करना उचित माना गया है, जिससे शत्रुओं को पीड़ा पहुँचे।' ॥67-68॥
Maharishi Valmiki has sung a verse on this earth in the past. The meaning of which is as follows - 'Monkey! You say that women should not be killed, in answer to that I say that for an industrious man, it has always been considered appropriate to do that work which causes pain to the enemies.' ॥ 67-68॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥