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mahabharat 7.143.63-64: मेरी भुजाएँ विद्यमान हैं और मैं अपने ऊपर हुए आक्रमण का बदला लेने के लिए निरंतर प्रयत्नशील हूँ। किन्तु यदि आप नेत्रों के होते हुए भी मुझे मरा हुआ समझते हैं, तो यह आपकी बुद्धि की मंदता को दर्शाता है। हे कुरुश्रेष्ठ! मैंने भूरिश्रवा को मारकर अपना बदला ले लिया है, जो सर्वथा उचित है। 63-64।   |   mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक 63-64
 
 
श्लोक  7.143.63-64 
चेष्टमानं प्रतीघाते सभुजं मां सचक्षुष:॥ ६३॥
मन्यध्वं मृत इत्येवमेतद् वो बुद्धिलाघवम्।
युक्तो ह्यस्य प्रतीघात: कृतो मे कुरुपुङ्गवा:॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
मेरी भुजाएँ विद्यमान हैं और मैं अपने ऊपर हुए आक्रमण का बदला लेने के लिए निरंतर प्रयत्नशील हूँ। किन्तु यदि आप नेत्रों के होते हुए भी मुझे मरा हुआ समझते हैं, तो यह आपकी बुद्धि की मंदता को दर्शाता है। हे कुरुश्रेष्ठ! मैंने भूरिश्रवा को मारकर अपना बदला ले लिया है, जो सर्वथा उचित है। 63-64।
 
My arms are present and I have been continuously trying to take revenge for the attack on me. But even though you have eyes, if you consider me dead, then it shows the dullness of your intellect. O best of the Kurus! I have taken revenge by killing Bhurishrava, which is absolutely justified. 63-64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)