Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.143.57-58: आपके सैनिकों ने सात्यकि के पक्ष और विपक्ष में बहुत सी बातें कहीं। अन्त में उन्होंने यह कहा - 'इसमें सात्यकि का कोई दोष नहीं है। वह बहुत होनहार थी। इसलिए आप लोग अपने मन में क्रोध न करें; क्योंकि क्रोध ही मनुष्यों के लिए सबसे अधिक दुःखदायी है।' 57-58 | mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पक्षवादांश्च सुबहून् प्रावदंस्तव सैनिका:॥ ५७॥
न वार्ष्णेयस्यापराधो भवितव्यं हि तत् तथा।
तस्मान्मन्युर्न व: कार्य: क्रोधो दु:खतरो नृणाम्॥ ५८॥
अनुवाद
आपके सैनिकों ने सात्यकि के पक्ष और विपक्ष में बहुत सी बातें कहीं। अन्त में उन्होंने यह कहा - 'इसमें सात्यकि का कोई दोष नहीं है। वह बहुत होनहार थी। इसलिए आप लोग अपने मन में क्रोध न करें; क्योंकि क्रोध ही मनुष्यों के लिए सबसे अधिक दुःखदायी है।' 57-58
Your soldiers said many things in favour and against Satyaki. At last they said this - 'There is no fault of Satyaki in this. She was very promising. Therefore you people should not be angry in your hearts; because anger is the most painful for humans. 57-58.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥