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mahabharat 7.143.56-57h: इन्द्र के समान वीर और युद्ध में हस्तक्षेप करने वाले भूरिश्रवा को मारा हुआ देखकर सिद्धों, चारणों, मनुष्यों और देवताओं ने उसकी स्तुति की; क्योंकि वे भूरिश्रवा के कर्मों से आश्चर्यचकित थे ॥56 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  7.143.56-57h 
सहस्राक्षसमं चैव सिद्धचारणमानवा:।
भूरिश्रवसमालोक्य युद्धे प्रायगतं हतम्॥ ५६॥
अपूजयन्त तं देवा विस्मितास्तेऽस्य कर्मभि:।
 
 
अनुवाद
इन्द्र के समान वीर और युद्ध में हस्तक्षेप करने वाले भूरिश्रवा को मारा हुआ देखकर सिद्धों, चारणों, मनुष्यों और देवताओं ने उसकी स्तुति की; क्योंकि वे भूरिश्रवा के कर्मों से आश्चर्यचकित थे ॥56 1/2॥
 
Seeing Bhurishrava, who was brave like Indra and the one who intervened in the war, killed, the Siddhas, Charanas, humans and gods praised him; Because they were surprised by the deeds of Bhurishrava. 56 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)