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mahabharat 7.143.48: भगवान् श्रीकृष्ण बोले - निरन्तर अग्निहोत्र यज्ञ करने वाले भूरिश्रवाजी! तुम शीघ्र ही उन लोकों में पहुँचो जो मेरे पवित्र लोक हैं, जो निरन्तर प्रकाशित रहते हैं और जहाँ ब्रह्मा आदि देवता भी सदैव जाने की इच्छा रखते हैं और मेरी ही तरह तुम भी गरुड़ की पीठ पर बैठकर विचरण करने वाले होगे॥48॥   |   mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.143.48 
वासुदेव उवाच
ये लोका मम विमला: सकृद् विभाता
ब्रह्माद्यै: सुरवृषभैरपीष्यमाणा:।
तान् क्षिप्रं व्रज सतताग्निहोत्रयाजिन्
मत्तुल्यो भव गरुडोत्तमाङ्गयान:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
भगवान् श्रीकृष्ण बोले - निरन्तर अग्निहोत्र यज्ञ करने वाले भूरिश्रवाजी! तुम शीघ्र ही उन लोकों में पहुँचो जो मेरे पवित्र लोक हैं, जो निरन्तर प्रकाशित रहते हैं और जहाँ ब्रह्मा आदि देवता भी सदैव जाने की इच्छा रखते हैं और मेरी ही तरह तुम भी गरुड़ की पीठ पर बैठकर विचरण करने वाले होगे॥48॥
 
Lord Shri Krishna said – Bhurishravaji, who continuously performs Agnihotra yajna! You should soon reach those worlds which are my pure worlds which are constantly illuminated and where Brahma etc. Gods also always desire to go and like me, you will be the one who roams around sitting on the back of Garuda. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)