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mahabharat 7.143.39: भरतनन्दन! पाण्डवपुत्र अर्जुन को तनिक भी क्रोध नहीं आया। मानो पुरानी बातें याद दिलाते हुए कौरवों पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा-॥39॥   |   mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  7.143.39 
असंक्रुद्धमना वाच: स्मारयन्निव भारत।
उवाच पाण्डुतनय: साक्षेपमिव फाल्गुन:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! पाण्डवपुत्र अर्जुन को तनिक भी क्रोध नहीं आया। मानो पुरानी बातें याद दिलाते हुए कौरवों पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा-॥39॥
 
Bharatanandan! Pandava's son Arjun did not feel any anger at all. As if reminding the old things, he said while accusing the Kauravas-॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)