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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.143.22 
न चात्मा रक्षितव्यो वै राजन् रणगतेन हि।
यो यस्य युज्यतेऽर्थेषु स वै रक्ष्यो नराधिप॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! युद्धभूमि में गए हुए योद्धा के लिए केवल अपनी ही रक्षा करना उचित नहीं है। हे मनुष्यों के स्वामी! जो कोई दूसरे के कार्य में संलग्न होता है, उसकी रक्षा वह व्यक्ति अवश्य करता है।
 
O King! It is not appropriate for a warrior who has gone to the battlefield to protect only himself. O Lord of men! Whoever is involved in the work of another is certainly protected by that person.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)