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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.143.2 
प्रहरिष्यन् हृतो बाहुरदृश्येन किरीटिना।
वेगेन न्यपतद् भूमौ पञ्चास्य इव पन्नग:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वह भुजा जो आक्रमण करने के लिए तैयार थी, अर्जुन के बाण से उसके अनजाने में ही कट गई और पांच मुंह वाले सर्प के समान बड़े वेग से पृथ्वी पर गिर पड़ी।
 
That arm which was ready to attack was cut by Arjun's arrow without his knowledge and fell on the earth with great force like a five-headed serpent.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)