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mahabharat 7.143.19-20h: क्षत्रिय अपने भाई, पिता, पुत्र, सम्बन्धी, मित्र और समवयस्क साथियों से घिरे हुए शत्रुओं से युद्ध करते हैं। ये सभी प्रधान योद्धा के बल पर ही आश्रित रहते हैं॥19 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.143.19-20h 
युध्यन्ति क्षत्रिया: शत्रून् स्वै: स्वै: परिवृता नरा:।
भ्रातृभि: पितृभि: पुत्रैस्तथा सम्बन्धिबान्धवै:॥ १९॥
वयस्यैरथ मित्रैश्च ते च बाहुं समाश्रिता:।
 
 
अनुवाद
क्षत्रिय अपने भाई, पिता, पुत्र, सम्बन्धी, मित्र और समवयस्क साथियों से घिरे हुए शत्रुओं से युद्ध करते हैं। ये सभी प्रधान योद्धा के बल पर ही आश्रित रहते हैं॥19 1/2॥
 
The Kshatriyas fight against their enemies surrounded by their brothers, fathers, sons, relatives, friends and companions of similar age. All of them are dependent on the strength of the chief warrior.॥19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)