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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.143.10 
आर्येण सुकरं त्वाहुरार्यकर्म धनंजय।
अनार्यकर्म त्वार्येण सुदुष्करतमं भुवि॥ १०॥
 
 
अनुवाद
धनंजय! श्रेष्ठ पुरुष के लिए श्रेष्ठ कर्म ही शुभ माने जाते हैं। इस पृथ्वी पर उसके लिए नीच कर्म करना अत्यंत कठिन माना जाता है।
 
Dhananjay! For a noble man, only noble deeds are considered auspicious. Performing lowly deeds is considered extremely difficult for him on this earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)