श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.142.9 
अद्य युद्धं महाघोरं तव दास्यामि सात्वत।
ततो ज्ञास्यसि तत्त्वेन मद्वीर्यबलपौरुषम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
सात्वत! आज मैं तुम्हें अत्यन्त भयंकर युद्ध का अवसर दूँगा। इससे तुम्हें मेरे बल, साहस और पुरुषार्थ का सच्चा ज्ञान होगा।॥9॥
 
‘Saatvat! Today I will give you the opportunity of a very fierce battle. Through this you will get the true knowledge of my strength, courage and manliness.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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