श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  7.142.72 
पार्थबाहुविसृष्ट: स महोल्केव नभश्च्युता।
सखड्गं यज्ञशीलस्य साङ्गदं बाहुमच्छिनत्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन की भुजाओं से निकले उस तीखे बाण ने, आकाश से गिरते हुए विशाल उल्का के समान, यज्ञ में तत्पर भूरिश्रवा की भुजा को तलवार सहित काट डाला।
 
That razor-sharp shot from Arjun's arms, like a huge meteor falling from the sky, cut off the arm of Bhurishrava, who was dedicated to sacrifices, along with the sword.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि भूरिश्रवोबाहुच्छेदे द्विचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें भूरिश्रवाकी भुजाका उच्छेदविषयक

एक सौ बयालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४२॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके १ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ७३ १/२ श्लोक हैं।)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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