Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.142.70: हे प्रभु! मेरी दृष्टि सिन्धुराज जयद्रथ पर लगी हुई थी। इसीलिए मैं सात्यकि की ओर नहीं देख रहा था; किन्तु अब मैं इस वीर यदुवंशी की रक्षा के लिए यह कठिन कार्य कर रहा हूँ। ॥70॥ | mahabharat अध्याय 7.142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे प्रभु! मेरी दृष्टि सिन्धुराज जयद्रथ पर लगी हुई थी। इसीलिए मैं सात्यकि की ओर नहीं देख रहा था; किन्तु अब मैं इस वीर यदुवंशी की रक्षा के लिए यह कठिन कार्य कर रहा हूँ। ॥70॥
Lord! My eyes were fixed on Sindhuraj Jayadratha. That is why I was not looking at Satyaki; but now I am performing this difficult task to protect this brave Yaduvanshi.' ॥ 70॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥