vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद
»
श्लोक 69
श्लोक
7.142.69
एवं तु मनसा राजन् पार्थ: सम्पूज्य कौरवम्।
वासुदेवं महाबाहुरर्जुन: प्रत्यभाषत॥ ६९॥
अनुवाद
राजन! इस प्रकार मन ही मन उस कुरुवंशी वीर पुरुष की प्रशंसा करते हुए महाबाहु कुन्तीकुमार अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा - 69॥
Rajan! In this way, praising that Kuruvanshi brave man in his heart, the mighty-armed Kuntikumar Arjun said to Lord Krishna - 69॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×