श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  7.142.67 
विकर्षन् सात्वतश्रेष्ठं क्रीडमान इवाहवे।
संहर्षयति मां भूय: कुरूणां कीर्तिवर्धन:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
कुरुकुल की कीर्ति बढ़ाने वाले भूरिश्रवा इस रणभूमि में सात्वतकुल के श्रेष्ठ योद्धा सात्यकि को घसीटते हुए खेल रहे हैं और बार-बार मेरे हर्ष को बढ़ा रहे हैं ॥67॥
 
Bhurishrava, who has increased the fame of Kurukula, is playing like dragging Satyaki, the best warrior of Satvatakul, in this battlefield and is increasing my joy again and again. 67॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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