श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  7.142.64 
पश्य वृष्ण्यन्धकव्याघ्रं सौमदत्तिवशं गतम्।
तव शिष्यं महाबाहो धनुष्यनवरं त्वया॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! देखो, वृष्णि और अंधक वंश का वह सिंह भूरिश्रवा के वश में आ गया है। वह आपका शिष्य है और धनुर्विद्या में आपसे किसी प्रकार कम नहीं है॥ 64॥
 
‘Mahabaho! Look, that lion of the Vrishni and Andhaka clan has fallen under the control of Bhurishrava. He is your disciple and is no less than you in the art of archery.॥ 64॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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