श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  7.142.63 
तं तथा परिकृष्यन्तं दृष्ट्वा सात्वतमाहवे।
वासुदेवस्ततो राजन् भूयोऽर्जुनमभाषत॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
राजन! इस प्रकार युद्धस्थल में केश खींचे जाने के कारण सात्यकि को पीड़ित देखकर भगवान श्रीकृष्ण पुनः अर्जुन से इस प्रकार बोले-॥63॥
 
Rajan! Thus, seeing Satyaki suffering due to hair being pulled on the battlefield, Lord Krishna again spoke to Arjun thus -॥ 63॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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