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mahabharat 7.142.61: फिर उसने अपने कुण्डल-विभूषित सिर को धड़ से अलग करने का प्रयत्न आरम्भ किया। उस समय सात्यकि भी बड़ी तेजी से अपना सिर हिलाने लगा।   |   mahabharat अध्याय 7.142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  7.142.61 
ततोऽस्य छेत्तुमारब्ध: शिर: कायात् सकुण्डलम्।
तावत्क्षणात् सात्वतोऽति शिर: सम्भ्रमयंस्त्वरन्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
फिर उसने अपने कुण्डल-विभूषित सिर को धड़ से अलग करने का प्रयत्न आरम्भ किया। उस समय सात्यकि भी बड़ी तेजी से अपना सिर हिलाने लगा।
 
Then he started the effort to separate his earring-adorned head from the body. At that time Satyaki also started moving his head very quickly. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)