श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.142.53 
अथ कृष्णो महाबाहुरर्जुनं प्रत्यभाषत।
पश्य वृष्ण्यन्धकव्याघ्रं सौमदत्तिवशं गतम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
तब महाबाहु श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा - 'पार्थ! देखो, वृष्णि और अंधक वंश का वह श्रेष्ठ योद्धा भूरिश्रवा के वश में आ गया है ॥53॥
 
Then mighty-armed Shri Krishna said to Arjun - 'Parth! Look, that best warrior of Vrishni and Andhaka dynasty has fallen under the control of Bhurishrava. 53॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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