| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद » श्लोक 44-46 |
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| | | | श्लोक 7.142.44-46  | द्विपाविव विषाणाग्रै: शृङ्गैरिव महर्षभौ।
भुजयोक्त्रावबन्धैश्च शिरोभ्यां चावघातनै:॥ ४४॥
पादावकर्षसंधानैस्तोमराङ्कुशलासनै:।
पादोदरविबन्धैश्च भूमावुद्भ्रमणैस्तथा॥ ४५॥
गतप्रत्यागताक्षेपै: पातनोत्थानसम्प्लुतै:।
युयुधाते महात्मानौ कुरुसात्वतपुङ्गवौ॥ ४६॥ | | | | | | अनुवाद | | जैसे दो हाथी अपने दाँतों के अग्रभागों से और दो बैल अपने सींगों से लड़ते हैं, उसी प्रकार महामनस्वी कुरु और सात्वतवंश के प्रधान योद्धा दोनों एक दूसरे से युद्ध कर रहे थे। वे कभी एक दूसरे को भुजाओं से बाँधते, कभी सिरों को आपस में टकराते, कभी पैरों से खींचते, कभी पैरों को एक दूसरे के चारों ओर लपेटते, कभी ताल ठोकते, कभी अंकुश चलाने के समान एक दूसरे को खुजलाते, कभी पादबन्धन, उदरबन्धन, उद्भ्रमण 1, गता 2, प्रत्यागत 3, आक्षेप 4, पतन 5, उत्थान 6 और संपुट 7 आदि क्रियाएँ प्रदर्शित करते। | | | | Just as two elephants fight with the front parts of their tusks and two bulls fight with their horns, similarly, both the great-minded Kuru and the chief warriors of the Satvat dynasty were fighting each other, sometimes tying each other with the arms, sometimes clashing their heads, sometimes pulling each other with the legs, sometimes wrapping their legs around each other, sometimes striking a rhythm as if striking a tomahawk, sometimes scratching each other as if driving a goad, sometimes demonstrating moves like foot binding, abdomen binding, udbhramana 1, gata 2, pratyaagat 3, aakhep 4, fall 5, upliftment 6 and samplut 7. | | ✨ ai-generated | | |
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