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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.142.41 
व्यूढोरस्कौ दीर्घभुजौ नियुद्धकुशलावुभौ।
बाहुभि: समसज्जेतामायसै: परिघैरिव॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
दोनों की छाती चौड़ी और भुजाएँ बड़ी थीं। दोनों कुश्ती में निपुण थे और लोहे के छल्ले जैसी मजबूत भुजाओं से एक-दूसरे से उलझे हुए थे।
 
Both had broad chests and large arms. Both were skilled in wrestling and were entangled with each other by their arms which were as strong as iron rings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)