श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.142.4 
अद्य त्वां समरे हत्वा नित्यं शूराभिमानिनम्।
नन्दयिष्यामि दाशार्ह कुरुराजं सुयोधनम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
दाशार्ह! तुम सदैव अपने को महान योद्धा मानते हो। आज मैं युद्धभूमि में तुम्हें मारकर कुरुराज दुर्योधन को प्रसन्न करूँगा।'
 
‘Dashaarh! You always consider yourself a great warrior. Today I will make Kuru king Duryodhana happy by killing you in the battlefield. 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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