Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.142.24-25h: प्रजानाथ! प्रभु! सात्यकि ने भूरिश्रवा के उन तीखे बाणों को आकाश में ही अपने अस्त्रों के बल से नष्ट कर दिया, इससे पहले कि वे उस तक पहुँच पाते ॥24 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  7.142.24-25h 
तानस्य विशिखांस्तीक्ष्णानन्तरिक्षे विशाम्पते॥ २४॥
अप्राप्तानस्त्रमायाभिरग्रसत् सात्यकि: प्रभो।
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! प्रभु! सात्यकि ने भूरिश्रवा के उन तीखे बाणों को आकाश में ही अपने अस्त्रों के बल से नष्ट कर दिया, इससे पहले कि वे उस तक पहुँच पाते ॥24 1/2॥
 
Prajanath! Lord! Satyaki destroyed those sharp arrows of Bhurishrava in the sky with the power of his weapons before they could reach him. 24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)