श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  7.142.22-23h 
सौमदत्तिस्तु शैनेयं प्रच्छाद्येषुभिराशुगै:॥ २२॥
जिघांसुर्भरतश्रेष्ठ विव्याध निशितै: शरै:।
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! सोमदत्त के पुत्र भूरिश्रवाण ने शिनिप्रवर सात्यकि को मारने की इच्छा से उन्हें तीव्र गति वाले बाणों से आच्छादित कर दिया और तीखे बाणों से उन्हें घायल कर दिया ॥22 1/2॥
 
Bharatshrestha! Bhurishravane, son of Somdatta, desirous of killing Shinipravar Satyaki, covered him with fast-moving arrows and wounded him with sharp arrows. 22 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas