श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.142.15 
नाहं भीषयितुं शक्यो वाङ्मात्रेण तु केवलम्।
स मां निहन्यात् संग्रामे यो मां कुर्यान्निरायुधम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
मैं केवल शब्दों से भयभीत नहीं हो सकता। युद्ध में, जो मुझे शस्त्रहीन कर दे, वही मुझे मार सकता है।॥15॥
 
‘I cannot be frightened by mere words. In battle, only he who renders me weaponless can kill me.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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