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श्लोक 7.142.15  |
नाहं भीषयितुं शक्यो वाङ्मात्रेण तु केवलम्।
स मां निहन्यात् संग्रामे यो मां कुर्यान्निरायुधम्॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| मैं केवल शब्दों से भयभीत नहीं हो सकता। युद्ध में, जो मुझे शस्त्रहीन कर दे, वही मुझे मार सकता है।॥15॥ |
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| ‘I cannot be frightened by mere words. In battle, only he who renders me weaponless can kill me.॥ 15॥ |
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