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mahabharat 7.142.14: राजन! भूरिश्रवा की यह बात सुनकर युयुधान ने हँसकर उत्तर दिया - 'कुरुनन्दन! युद्ध में मैं कभी किसी से नहीं डरता।'   |   mahabharat अध्याय 7.142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.142.14 
युयुधानस्तु तं राजन् प्रत्युवाच हसन्निव।
कौरवेय न संत्रासो विद्यते मम संयुगे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजन! भूरिश्रवा की यह बात सुनकर युयुधान ने हँसकर उत्तर दिया - 'कुरुनन्दन! युद्ध में मैं कभी किसी से नहीं डरता।'
 
Rajan! Hearing this from Bhurishrava, Yuyudhana replied laughingly - 'Kurunandan! I am never afraid of anyone in war. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)