श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.142.13 
मच्चक्षुर्विषयं प्राप्तो न त्वं माधव मोक्ष्यसे।
सिंहस्य विषयं प्राप्तो यथा क्षुद्रमृगस्तथा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘माधव! जैसे सिंह के सामने आने पर छोटा-सा हिरण जीवित नहीं रह सकता, वैसे ही मेरी आँखों के सामने आने पर तुम भी जीवित नहीं रह सकोगे।’॥13॥
 
‘Madhava! Just like a small deer cannot survive after coming in the sight of a lion, similarly, you will not be able to survive after coming in front of my eyes.’॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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