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mahabharat 7.142.12: मधुकुलनन्दन! आज मैं तीखे बाणों से आपकी पूजा करके उन वीरों की पत्नियों को प्रसन्न करुँगा, जिन्हें आपने युद्धस्थल में मार डाला है।   |   mahabharat अध्याय 7.142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.142.12 
अद्य तेऽपचितिं कृत्वा शितैर्माधव सायकै:।
तत्स्त्रियो नन्दयिष्यामि ये त्वया निहता रणे॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मधुकुलनन्दन! आज मैं तीखे बाणों से आपकी पूजा करके उन वीरों की पत्नियों को प्रसन्न करुँगा, जिन्हें आपने युद्धस्थल में मार डाला है।
 
Madhukulanandan! Today, by worshipping you with sharp arrows, I will make the wives of those heroes, whom you have killed on the battlefield, happy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)