श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.141.30 
सोऽयं गुरुतरो भार: सैन्धवार्थे समाहित:।
ज्ञातव्यश्च हि मे राजा रक्षितव्यश्च सात्यकि:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
इस समय सिन्धुराज जयद्रथ के कारण मुझ पर बहुत बड़ा भार आ पड़ा है। एक तो मुझे राजा का कुशल-क्षेम जानना है और दूसरे, सात्यकि की भी रक्षा करनी है॥ 30॥
 
‘At this time, a huge burden has fallen on me because of Sindhuraj Jayadratha. Firstly, I have to know the well-being of the king and secondly, I have to protect Satyaki as well.॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)