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mahabharat 7.141.26: तब कुन्तीपुत्र अर्जुन ने हर्ष में भरकर केशव से कहा - 'महाबाहु! मेरे पास आने वाले सात्यकि मुझे अच्छे नहीं लग रहे हैं॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 7.141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.141.26 
तत: प्रहृष्ट: कौन्तेय: केशवं वाक्यमब्रवीत्।
न मे प्रियं महाबाहो यन्मामभ्येति सात्यकि:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तब कुन्तीपुत्र अर्जुन ने हर्ष में भरकर केशव से कहा - 'महाबाहु! मेरे पास आने वाले सात्यकि मुझे अच्छे नहीं लग रहे हैं॥ 26॥
 
Then Arjuna, the son of Kunti, filled with joy, said to Kesava - 'Mahabahu! I do not like Satyaki who is coming to me.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)