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mahabharat 7.141.25: रक्त और मांस की कीचड़ से युक्त रक्त की नदी बहाकर तथा कौरव सैनिकों को तिनके की तरह उड़ाकर यह सात्यकि इस ओर आ रहा है।'   |   mahabharat अध्याय 7.141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.141.25 
रुधिरौघवतीं कृत्वा नदीं शोणितकर्दमाम्।
तृणवद् व्यस्य कौरव्यानेष ह्यायाति सात्यकि:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
रक्त और मांस की कीचड़ से युक्त रक्त की नदी बहाकर तथा कौरव सैनिकों को तिनके की तरह उड़ाकर यह सात्यकि इस ओर आ रहा है।'
 
Having caused a river of blood to flow, mixed with the mud of blood and flesh, and having blown away the Kaurava soldiers like straws, this Satyaki is coming this way.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)