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mahabharat 7.141.20: कुन्तीपुत्र! धर्मराज द्वारा भेजे हुए सात्यकि अपने बाहुबल का आश्रय लेकर कौरव सेना को विदीर्ण करके यहाँ आ रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.141.20 
स्वबाहुबलमाश्रित्य विदार्य च वरूथिनीम्।
प्रेषितो धर्मराजेन पार्थैषोऽभ्येति सात्यकि:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्र! धर्मराज द्वारा भेजे हुए सात्यकि अपने बाहुबल का आश्रय लेकर कौरव सेना को विदीर्ण करके यहाँ आ रहे हैं।
 
Kunti's son! Taking recourse to his physical strength, Satyaki sent by Dharmaraja is coming here after tearing apart the Kaurava army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)