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mahabharat 7.141.18: पाण्डुनन्दन! महाबली सात्यकि कौरव सेना में अत्यन्त कठिन पराक्रम करके आपके दर्शन की इच्छा से यहाँ आ रहे हैं। 18॥   |   mahabharat अध्याय 7.141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.141.18 
कृत्वा सुदुष्करं कर्म सैन्यमध्ये महाबल:।
तव दर्शनमन्विच्छन् पाण्डवाभ्येति सात्यकि:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! महाबली सात्यकि कौरव सेना में अत्यन्त कठिन पराक्रम करके आपके दर्शन की इच्छा से यहाँ आ रहे हैं। 18॥
 
Pandunandan! Mahabali Satyaki is coming here with the desire to see you after performing a very difficult feat within the Kaurava army. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)