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mahabharat 7.141.15: हे किरीटधारी अर्जुन! वही सात्यकि जो तुम्हें प्राणों के समान प्रिय है, कौरव योद्धाओं में महान् त्रास उत्पन्न करके आ रहा है॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 7.141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.141.15 
एष कौरवयोधानां कृत्वा घोरमुपद्रवम्।
तव प्राणै: प्रियतम: किरीटिन्नेति सात्यकि:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे किरीटधारी अर्जुन! वही सात्यकि जो तुम्हें प्राणों के समान प्रिय है, कौरव योद्धाओं में महान् त्रास उत्पन्न करके आ रहा है॥ 15॥
 
Crown-wearing Arjuna! The same Satyaki who is as dear to you as your life is coming after causing great distress among the Kaurava warriors.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)