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mahabharat 7.141.14: यह वीर योद्धा आपका शिष्य भी है और मित्र भी। इस सिंह-पुरुष ने समस्त योद्धाओं को तिनके के समान समझकर परास्त कर दिया है॥14॥   |   mahabharat अध्याय 7.141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.141.14 
एष शिष्य: सखा चैव तव सत्यपराक्रम:।
सर्वान् योधांस्तृणीकृत्य विजिग्ये पुरुषर्षभ:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यह वीर योद्धा आपका शिष्य भी है और मित्र भी। इस सिंह-पुरुष ने समस्त योद्धाओं को तिनके के समान समझकर परास्त कर दिया है॥14॥
 
This brave warrior is your disciple and friend as well. This lion-man has defeated all the warriors considering them as straws.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)