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mahabharat 7.141.12: जिस प्रकार जल में तैरते हुए थका हुआ मनुष्य भूमि पर पहुँचता है, उसी प्रकार सिंहहृदय अर्जुन को देखकर युयुधान को राहत मिली।   |   mahabharat अध्याय 7.141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.141.12 
तरन्निव जले श्रान्तो यथा स्थलमुपेयिवान्।
तं दृष्ट्वा पुरुषव्याघ्रं युयुधान: समाश्वसत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार जल में तैरते हुए थका हुआ मनुष्य भूमि पर पहुँचता है, उसी प्रकार सिंहहृदय अर्जुन को देखकर युयुधान को राहत मिली।
 
Just as a man exhausted while swimming in water reaches the land, similarly Yuyudhan felt relieved after seeing the lion-hearted Arjuna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)