Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.140.4: जब से मैंने यह जाना है, तब से शोक मुझे उसी प्रकार जला रहा है जैसे काष्ठ से उत्पन्न अग्नि अपने ही आधार काष्ठ को जला देती है। मैं सिंधुराज जयद्रथ सहित समस्त राजाओं को मृत्यु के ग्रास समझ रहा हूँ॥ 4॥ | mahabharat अध्याय 7.140: सात्यकिद्वारा राजा अलम्बुषका और दु:शासनके घोड़ोंका वध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब से मैंने यह जाना है, तब से शोक मुझे उसी प्रकार जला रहा है जैसे काष्ठ से उत्पन्न अग्नि अपने ही आधार काष्ठ को जला देती है। मैं सिंधुराज जयद्रथ सहित समस्त राजाओं को मृत्यु के ग्रास समझ रहा हूँ॥ 4॥
Ever since I have come to know of this, grief has been burning me in the same way as a fire born from wood burns its own base wood. I consider all kings including Sindhuraj Jayadratha to be lost to death.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥